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सोचा न था

2212   2212   2212   2212 बह्र में ग़ज़ल


तेरी जुदाई में जी पाएंगे कभी सोचा न था,
वो था फ़रेब-ए-इश्क़ तेरा, वो भी तो सच्चा न था।

एतबार के धागे से बंधा राब्ता था अपना जो,
यूँ टूटा इतना भी हमारा रिश्ता ये कच्चा न था।

ख़्वाहिश थी तुझको इक दफ़ा देखूँ पलटकर भी मगर,
मुझको यूँ ही जाते हुए तूने कभी रोका न था।

तुझ से बिछड़के क्या ग़म-ओ-अफसोस करना ऐ सनम,
खोने का भी क्या रंज हो जिसको कभी पाया न था।

सह भी लिए ज़ोया ने सब ज़ुल्म-ओ-सितम भी इसलिए,
खोया था अपनों को, तुझे भी अब उसे खोना न था।

स्वरचित (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

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तुम हो

दोस्तों बह्र में मेरी पहली ग़ज़ल पेश-ए-ख़िदमत है।

बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन

1222 1222 1222

मिरी हर बात में, हर लफ़्ज़ में तुम हो,
जुदा ना मुझसे, मेरे अक्स में तुम हो।

तिरी ख़ुश्बू से मेरी, साँसें है चलती,
मिरे दिल तक हैं जो,हर नब्ज़ में तुम हो।

तू ही रब, तू दुआ भी हो सनम मेरे,
यूँ शामिल ऐसे, मेरी नफ़्स में तुम हो।

तू है उनवान तू ही इख़्तिताम भी है,
किताब-ए-ज़िन्दगी के हर्फ़ में तुम हो।

शुरू तुझ से, ख़तम तुझ पे मिरी तहरीर,
यूँ ‘ज़ोया’ की ग़ज़ल, हर नज़्म में तुम हो।

स्वरचित (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

उर्दू शब्दों के अर्थ:- [ इख़्तिताम=समापन, ending/ तहरीर=लेखनी/ नब्ज़=रग/ नफ़्स=आत्मा,रूह/ उनवान=शीर्षक]

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हिन्दी मेरी पहचान है

हिन्दी मेरी पहचान है, दिल से उसे अपनाया है
विविधता में, हर भारतीय हिन्दी से जुड़ पाया है

मातृभाषा पर गर्व करें, हिन्दी हमारे राष्ट्र की धरोहर है
राजभाषा का सम्मान करें, हिन्दी संस्कृति की बुनियाद है 

संस्कृत से उद्गम हुई, हिन्दी देवनागरी लिपि है
सबसे सरल, सहज, प्यारी, हिन्दी भाषा मीठी है

हिन्दी बोलने वालों का न करो अपमान, करें हिन्दी का मान
हिन्दी दिवस का है विशेष स्थान, विश्व में बढ़ाओ इसकी शान।

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

आप सभी को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🇮🇳

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गुरु

अज्ञान का अंधकार मिटाकर, ज्ञान का दीपक जलाता है
उँच-नीच ना देखकर, वो अपना फ़र्ज़ बखूबी निभाता है

सत्य, अनुशासन का पाठ पढ़ाकर, हर बुराई मिटाता है
हर सवाल का जवाब देकर, सारी उलझन सुलझाता है

भटके हुए को राह दिखाकर, वह मार्गदर्शक बन जाता है
स्वयं में आत्मविश्वास जगाकर,लक्ष्य की मंजिल दिखाता है

पाप एवं लालच त्याग कर, धार्मिक संस्कार सिखाता है
गुमनामी से बाहर लाकर, एक नई पहचान दिलाता है

अज्ञानता के भंवर से निकाल कर, नैया पार लगाता है
संचित ज्ञान का धन देकर, सबका जीवन संवारता है

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान सफल हो जाता है
शिष्य बुलंदियों को छूकर, गुरु चरणों में शीश झुकाता है।

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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जन्माष्टमी

Image source: Internet

माँ देवकी ने जन्म दिया, माँ यशोदा का पुत्र कहलाए
एक हाथ में बंसी उसके, दूजे से मटकी फोड़ माखन चुराए

सबका प्यारा नटखट लाला, मैया यशोदा को बड़ा सताए
राधा को जलाने शरारती कान्हा, गोपियों संग रास लीला रचाए

रसिया कान्हा रक्षक बन, सभा में द्रोपदी की लाज बचाए
हर बच्चे को समझाए कृष्ण ज्ञान, तभी जन्माष्टमी सफल हो जाए।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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भारत की शान है तिरंगा

भारत की शान है तिरंगा
हमारा मान है तिरंगा

जवान की आन-बान है तिरंगा
दुश्मनों का बुरा अंजाम है तिरंगा

भारत की आवाम की पहचान है तिरंगा
भारतीयों का अरमान है लहराता तिरंगा

जीत का एलान है तिरंगा
किसान की जान है तिरंगा

हर एक इंसान का चारों धाम है तिरंगा
जिसके आगे मस्तक ऊंचा ऐसा चढ़ान है तिरंगा

तीन रंग से चमकता है हमारा तिरंगा
राष्ट्रीय गान में फहराए तिरंगा

भारत विकास का अभियान है तिरंगा
हिन्दुस्तान का अभिमान है तिरंगा

मेरे लिए मेरा ध्यान है तिरंगा
आज मेरी कविता का कलाम है तिरंगा

भारत की शान है तिरंगा
भारत की शान है तिरंगा।

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

स्वरचित / सर्वाधिकार सुरक्षित

देश के आजाद होने के बाद संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया था। हमारे देश की शान है तिरंगा झंडा।

आप सभी को तिरंगा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।🇮🇳

Image Credit: Google

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कुछ क़समें झूठी सी

इज़हार-ए-इश्क़ में कुछ क़समें झूठी सी उसने खाई थी,
यक़ीन नहीं आता, क्या मोहब्बत भी झूठी दिखाई थी?

सरेआम नीलाम कर दिए उसने मेरे हर एक ख़्वाब को,
जिसने मेरे दिन का चैन औ मेरी रातों की नींद चुराई थी।

जिसे समझ बैठी थी मैं आग़ाज़-ए-मोहब्बत हमारी,
दरअसल वो तो मिरे दर्द-ए-दिल की इब्तिदाई थी।

यूँ तो नज़रअंदाज़ कर गई मैं उसकी सारी गलतियां,
मगर क्या अच्छाई के पीछे भी छुपी उसकी बुराई थी!

अब कैसा गिला और क्या शिकायत करूँ उस से!
जब दोनों के मुक़द्दर में ही लिखी गई जुदाई थी।

उसकी इतनी बे-हयाई और बेवफ़ाई के बावज़ूद भी,
माफ़ कर दिया उसे, ये तो ‘ज़ोया’ की भलाई थी।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

शुक्रिया🙂

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© Jalpa lalani ‘Zoya’

Thank you!😊

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आग़ाज़-ए-शायरी

मेरी ज़िंदगी में तुम हो तो सब है
तुझसे शुरू मेरी सहर औ शब है
सजदा-ए-इश्क़ में सर झुका दूँ
कि मेरे लिए तो तू ही मेरा रब है।

★★★★★★★★★★★★★★★

है एक छोटी सी आशा, ऊँचे आसमाँ में उड़ना है स्वछंद,
है यही एक अभिलाषा, कोई कतरे ना मेरे ख़्वाबों के पंख।

★★★★★★★★★★★★★★★

कदम से कदम मिला के प्रेम डगर पर चलना है
हाथों में हाथ डाल के इसे कभी ना छोड़ना है
सफ़र-ए-मोहब्बत में बिछे हो चाहे लाखों शूल
आए कितनी भी रुकावटे मंज़िल को हमें पाना है।

★★★★★★★★★★★★★★★

इस जहाँ की नज़रों में बेनाम सा हमारा रिश्ता है,
है ये तड़प कैसी! कैसा रूह  के बीच वाबस्ता है!
हसरतें दम तोड़ रही हैं अब आहिस्ता आहिस्ता,
अवाम की फ़िक्र नहीं, तुझ से ही  मेरा वास्ता है।

★★★★★★★★★★★★★★★

हिज्र-ए-यार में दिन काट लिए उसकी यादों के सहारे,
आरज़ू-ए-विसाल-ए-यार में हर रात ख़्वाबों में गुजारे।

★★★★★★★★★★★★★★★

उर्दू शब्दों के अर्थ:- शब = रात / वाबस्ता = संबंध / हिज़्र-ए-यार = यार की जुदाई / आरज़ू-ए-विसाल-ए-यार = यार से मिलन की उम्मीद

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित / सर्वाधिकार सुरक्षित)

शुक्रिया

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इन्डिया फ़िर से भारत बन गया

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

आज फ़िर से भारतीय नृत्य मंच पर छा गया,
आज फ़िर से भारतीय संगीत हर कोई गा रहा।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

कला के क्षेत्र में भारतीय कला की है बोलबाला,
आज झांसी की रानी बन गई हैं हर भारतीय बाला।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

आज फ़िर से विदेशों में भारत देश आगे आ गया,
नासा में भारत का वैज्ञानिक आज सफलता पा गया।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

आज फ़िर से आयुर्वेद विदेशियों ने भी है अपनाया,
सिर्फ़ भारत में नहीं पूरे विश्व ने योग दिवस है मनाया।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

आज फ़िर से संस्कृत को अभ्यासक्रम ने है अपनाया,
देखो ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम का दबदबा है छाया।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

एक दिन ऐसा आएगा जब भारत फ़िर से इतिहास बनाएगा,
तब सिर्फ़ दो दिन नहीं पूरा साल भारत जश्न मनाएगा।

इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।
इन्डिया फ़िर से भारत बन गया।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

🇮🇳जय हिन्द जय भारत🇮🇳

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पुरानी यादों की चादर

ख़ुशी, ग़म, प्रेम, धोखे के टुकड़े मिलाकर,
बुन ली है मैंने पुरानी यादों की चादर।

सुराख़ से सर्द हवा झाँकती, मैली, फटी सी,
फिर भी गर्माहट देती पुरानी यादों की चादर।

जब सितम ढाए तेज़ धूप और गर्म हवा,
अंगारों सी तपती जमीं पर बनती मेरा बिस्तर।

कभी सताए बुरे ख़्वाब, हो तन्हाई महसूस,
पुरानी यादों की चादर ओढ़ लेती हूँ लपेटकर।

ख़ामोशी से जब बहता है अश्कों का सैलाब,
बन जाती माँ का आँचल पुरानी यादों की चादर।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

धन्यवाद

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तारीफ़-ए-हुस्न

सुनहरी लहराती ये ज़ुल्फ़ें तिरी और ये शबाब,
कोमल नाज़ुक बदन तिरा जैसे महकता गुलाब।

बैठ गया तू सामने तो साक़ी की क्या ज़रूरत,
सुर्ख़ थरथराते ये लब तिरे जैसे अंगूरी शराब।

सहर में जब तू लेता अंगड़ाई ओ मिरे सनम,
तुझे चूमने फ़लक से उतर आता है आफ़ताब।

रौशन कर दे अमावस की काली अँधेरी रात भी,
मिरा हसीं माशूक़ जब रुख़ से उठाता है हिजाब।

तारीफ़-ए-हुस्न लिखने को बेताब है मेरी कलम,
ग़ज़ल क्या! ‘ज़ोया’ तुझ पे लिख दूँ पूरी किताब।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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शुक्रिया

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कुछ शाम

तेरी ज़ुल्फ़ तले राहत देती हैं कुछ शाम,
तन्हाई में प्यास बुझाते तेरे यादों के जाम।

तेरी झुकी आँखों से फैला गहरा काजल,
लिख देता है मेरे दिल पर इश्क़ का पैगाम।

अंदाज़-ए-गुफ़्तगू तेरा दिल पर करता वार,
जब तूम भेजती हो यूँ इशारों से सलाम।

छूती है जब तेरे मीठे लबों से चाय,
दूर कर देती है मेरी दिन भर की थकान।

शाम-ओ-सहर दिल के कोरे काग़ज़ पर,
लिखता हूँ बस तेरा ही इक नाम।

चला दे गर मेरे दिल पर तू हुकूमत,
ये नाचीज़ बन जाए ताउम्र तेरा ग़ुलाम।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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शुक्रिया

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चल दूर कहीं

चल इस दुनिया से दूर कहीं हम दोनों चले जाते हैं,
नदी से मोहब्बत और फल से मीठा रस लाते हैं।

आसमाँ को चादर और जमीं को बिछौना बनाते हैं,
सूरज की रोशनी और ठंडी हवा से सुकून पाते हैं।

फूलों से खुशबू और चाँद से चाँदनी चुरा लाते हैं,
चलो उस जन्नत में जाकर आशियाना बनाते हैं।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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शुक्रिया

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नया साल मुबारक हो

कुछ डायरी के पन्ने भरेंगे इस साल में

पिछले बरस कई कोरे कागज़ छूट गए थे।

अब के बरस दिल के जज़्बात को बयां करना है कलम से

पिछले साल तो स्याही ही ख़त्म थी कलम में।

नये साल में कुछ नये दोस्त बन गए हैं

तो पिछले बरस के दोस्तों से कभी कभी बातें होती है।

कुछ दर्द चिल्ला उठे थे पिछले बरस में

अबके साल खुशियों की कविताएँ गाएंगे।

बहुत कुछ अधूरा रह गया पिछले साल में

बहुत ख्वाहिशें लेके दाखिल हुए हैं इस साल में।

बुरे लम्हे की कड़वी यादों को दफन कर दी है बंजर जमीं में

उन खूबसूरत यादों को जमा कर आए हैं बैंक के खाते में।

पिछले बरस में अब मुड़कर मत देखो

चल पड़ो आगे नया साल सब को मुबारक हो।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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Happy New Year💝🎉

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ईश्वर का रूप

ढूँढने उसको भटके, हर मानव दरबदर,
कभी झाँके धरा कभी ताके ऊँचा अम्बर।

कभी तलाशें संसार में कभी पूजे पत्थर,
गहराई में जाकर, कभी नापे है समंदर।

कोई कहे संगीत में बसा कोई कहे स्वर,
खोजे उसे, है जो निराकार है जो नश्वर।

सोचे मानुष, तू कैसा होगा रे है मेरे ईश्वर!
पूछे मानव, तू कैसा होगा रे है मेरे ईश्वर?

है वो शून्य में, उससे ही हुआ है विस्तार,
है वो कण कण में, किया है उसने प्रसार।

करे आत्मा प्रदीप्त, हरे मन का अंधकार,
वो परमपिता कराए सत्य से साक्षात्कार।

हर जीव पर बस उसका ही है अधिकार,
जीवन नैया को कराता है भवसागर पार।

सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान है सब में साकार,
है कितने रूप उसके, महिमा उसकी अपार।

अंतरतम से हर एक क्षण उसे स्मरण कर,
है तेरे आसपास ही कही वह प्रभु परमेश्वर।

न आदि न अंत उसका, है वो आत्मा अमर,
ध्यान जो करे निरंतर, पाले पूर्ण रूप ईश्वर।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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धन्यवाद।

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मुश्किल हो सकता है

बेशक अकेले चलना मुश्किल हो सकता है
लेकिन इस भीड़ में साथ चलने वाला है कौन?

बेशक सच बोलना मुश्किल हो सकता है
लेकिन झूठ बोलने से आगे निकल पाया है कौन?

बेशक दुःख में हंसना मुश्किल हो सकता है
लेकिन खुशी में खुलकर हँसने वाला है कौन?

बेशक दुश्मन से लड़ना मुश्किल हो सकता है
लेकिन लड़ाई में साथ देने वाला दोस्त है कौन?

बेशक किसी को खोना मुश्किल हो सकता है
लेकिन साथ होने के बावजूद यहाँ साथ है कौन?

बेशक सपने को साकार करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन बिना सपनों के यहाँ सोता है कौन?

बेशक किसी को माफ करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन बदला लेके यहाँ जीत पाया है कौन?

बेशक मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है
लेकिन यहाँ आसानी से महान बन पाया है कौन?

बेशक जीवन की पहेली हल करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन अंत से पहले इस पहेली को हल कर पाया है कौन?

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

धन्यवाद।

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Google

As we all know that Google is releasing its core update in December. तो इस पर मैंने एक शायरी बनाई है। उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी।

गूगल ने अपने मूल नवीनतम करके जीवन और आसान कर दिया है
गूगल ने मानचित्र में संदेश विकल्प जोड़ने का अब एलान कर दिया है
दिल-ओ-दिमाग के अनसुलझे हर एक सवाल का देता है तुरंत जवाब
सब है इसके आधीन, लोगों ने गूगल को आधुनिक भगवान कर दिया है।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

धन्यवाद।

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मरीज-ए-इश्क़

आजकल  कुछ अजीब  सा  मर्ज़ हुआ है,
मर्ज़ क्या, जैसे चुकाना कोई कर्ज़ हुआ है।

जाना हुआ मोहब्बत की दार-उल-शिफ़ा में,
बोला हक़ीम तुम्हें तो, दिल का दर्द हुआ है।

मर्ज़-ए-इश्क़  की  महंगी  पड़ी  है  तदबीर,
वस्ल-ए-यार  का इलाज  जो अर्ज़  हुआ है।

रूठा  है बीमारदार  इस मरीज-ए-इश्क़ का,
रूह-ए-जिस्म के पर्चे पर नाम दर्ज हुआ है।

ये साँसे  तो  चलती  है सनम  की खुशबू से,
क्या करें! मिरा महबूब  ही खुदगर्ज हुआ है।

परवा-ए-उम्मीद-ओ-बीम   न   कर   ‘ज़ोया’
इश्क़-ए-तबाही  में अक्सर ही  हर्ज हुआ है।

उर्दू शब्दों में अर्थ: मर्ज़=बीमारी/ दार-उल-शिफ़ा=अस्पताल/ तदबीर=उपाय/ वस्ल=मुलाक़ात/ बीमारदार=परिचारक /परवा-ए-उम्मीद-ओ-बीम=आशा की परवाह/ हर्ज=नुकशान

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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शुक्रिया।

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आगाज़-ए-शायरी (शेर-ओ-शायरी)

ख़ुदा के इशारों को समझ, हैं सही रब के फ़ैसले
मुश्किलात में वही देता है, तुम्हें सब्र और हौसले
इबादत, सख़ावत करके, कुछ नेकियां करले बंदे
सजदे में सर झुकाकर, गुनाहों से तौबा तू कर ले।

★★★★★★★★★★★★★★★★★

मुझे छोड़कर, बना दे तू अजनबी, अगर मुझसे नफ़रत है,
दूर मुझसे होकर, बढ़ती तेरी बेताबी, क्या ये तेरी उल्फ़त है!

★★★★★★★★★★★★★★★★★

बुझती नहीं मन की प्यास, नहीं होती तेरे इश्क़ की बरसात,
ढलती शब में करते उजास, तेरे साथ बिताए हरेक लम्हात।

★★★★★★★★★★★★★★★★★

बहुत कुछ बदलता हैं वक़्त के साथ
बदलते रहते हैं हालात और ख़्यालात
इतने आहत हो जाते हैं बाज़ औक़ात
कि ता-उम्र सुलगते रहते हैं जज़्बात
जो बुझा पाए इस दिल की आग
नहीं होती कभी वो इश्क़ की बरसात।

★★★★★★★★★★★★★★★★★

यूँ तो मेरा दिल बेशक़ तेरे दिए ज़ख्मों से मज़लूम है,
दिल चीर के देखना अब भी तेरी जगह मुस्तहकम है।

★★★★★★★★★★★★★★★★★

उर्दू शब्दों के अर्थ: सख़ावत=दान / तौबा=माफ़ी / उल्फ़त=प्यार / शब=रात / लम्हात=वक़्त / बाज़-औक़ात= कभी कभी / मज़लूम=आहत / मुस्तहकम=अटल

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

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शुक्रिया

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आगाज़-ए-शायरी (शेर-ओ-शायरी)

एहसास-ए-मोहब्बत जन्नत का सुकून देता है
हाँ ! आईने में महबूब का अक्स ज़ुनून देता है
जो तोड़ जाए दिल अक्सर वही रहता है याद
मरहम जो लगाता है ज़ख़्म भी यक़ीनन देता है।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

जज़्बात की चाशनी में एतबार का मावा मिल जाए
परवाह की खुशबू के साथ थोड़ा एहतराम घुल जाए
रंग और मेवा डालकर बढ़ जाती है मिठास इश्क़ की
बड़ी ही लज़ीज फिर मोहब्बत की मिठाई बन जाए।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

ज़िंदगी के उस  मोड़ पर अकेली मैं खड़ी थी
हौसले के औज़ार से मौत की जंग लड़ी थी
कुछ अजीब सी रोशनी को मैंने पास पाया था
बंदगी में ख़ुदा से जुड़ी मेरी रूह की कड़ी थी।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

ज़मीन-ए-दिल में दफ़न हैं अनसुनी शिकायतें
ग़म-ए-धूप से सूख गई हैं सारी अधूरी हसरतें
मुसलसल चल रही जहरीली मुसीबत की हवा 
लगता है ख़ुदा भी नहीं सुन रहा है मेरी मिन्नतें।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

क़ौस-ए-क़ुज़ह की कलम से
कुछ यादें लिखी हैं फ़लक पे
मुसलसल बरसती हैं बारिश
अक्सर सर-ज़मीन-ए-दिल पे।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

उर्दू शब्दों के अर्थ: अक्स=परछाई / क़ौस-ए-क़ुज़ह=इंद्रधनुष / मुसलसल=लगातार

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

शुक्रिया

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आगाज़-ए-शायरी (शेर-ओ-शायरी)

ग़म-ए-ज़िंदगी में  जीने की  चाहत होनी चाहिए,
तिजारत-ए-इश्क़ में प्यार की दौलत होनी चाहिए।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

माना ख़ार के बीच महकता गुलाब हो तुम,
बेशक ताउम्र पढ़ना चाहो वो किताब है हम।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

ख़्वाबों की बंद खिड़की खोल, वो सजा गया मेरी दुनिया,
हालात ने क्या दस्तक दी, उसने बदल दिया तौर तरीका।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

सच की पाठशाला में जब से इश्क़ है पढ़ लिया,
ख़ुदा-ए-पाक के नाम रूह पर इश्क़ लिख दिया।

★★★★★★★★★★★★★★★★★★

बस जाए दिल-ओ-दिमाग में हर लम्हा,
भर जाए किताब-ए-ज़ीस्त का हर पन्ना।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

उर्दू शब्दों के अर्थ: तिजारत=व्यापार/ ख़ार=कांटा/ किताब-ए-ज़ीस्त= ज़िंदगी की किताब

शुक्रिया

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दीपावली दोहे

आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।💥🎆

मन के तम को दूर कर, जलाओ आज दीप।
जीवात्मा प्रज्वलित कर, जला लो अमरदीप।।१।।

जो घर हो नारी मान, लक्ष्मी आए उस द्वार।
रखें देह, मन, हिय साफ़, मिले वैभव अपार।।२।।

जलती बाती तम हरे, दीपक तो आधार
अमावस में उजास करे, दीपों का त्योहार।।३।।

बुराई पर अच्छाई की, विजय हुई थी आज।
निज बुराई को तज कर, कीजिए अच्छे काज।।४।।

रंगों से सजा हर द्वार, लाए घर में उमंग।
लहराती दीपक ज्योति, भरे मन में तरंग।।५।।

पर्व है दीवाली का, हुआ जगमग संसार।
शहीदों के नाम जलाए, एक दीपक इस बार।।६।।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

धन्यवाद।

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मेरी कविता

‘मेरी कविता’ उनवान पर आज हूँ लिखती मेरी कविता,
सिर्फ अल्फ़ाज़ नहीं, मेरे जज़्बात बयां कर जाती मेरी कविता।

मेरी कविता में लिखा है मैंने ज़िंदगी का तज़ुर्बा,
सिर्फ पंक्तियां नहीं, एहसास महसूस कराती मेरी कविता।

मेरी कविता फ़क़त एक दास्ताँ नहीं, ख़ुलूस-ए-निहाँ हैं,
सिर्फ तसव्वुर नहीं, हरेक मर्ज़ की दवा देती मेरी कविता।

मेरी कविता सिर्फ दुनयावी खूबसूरती नहीं दिखाती,
क़ायनात से मोहब्बत, रहम करना सिखाती मेरी कविता।

सिर्फ लय, छंद, अलंकार नहीं, मेरी कविता बजती तरंग है,
माँ शारदे की आराधना से है आती मेरी कविता।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

Note: यह रचना प्रकाशित हो चुकी है और कॉपीराइट के अंतर्गत आती है।

शुक्रिया।

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ग़ज़ल

अश्कों को मेरे तेल समझ दीया जला दिया,
लहू को मेरे मरहम समझ ज़ख़्म पर लगा दिया।

बेइंतहा फिक्र करते थे उनकी शाम-ओ-सहर,
उसने हमारी परवाह का भी दाम लगा दिया।

इश्क़ में नहीं निभा सके वो वादा-ए-मोहब्बत,
और बेवफ़ा का इल्ज़ाम हम पर ही लगा दिया।

मोहब्बत करके दिल तोड़ गया वो मतलबी
फिर दोस्ती का नाम देकर एहसान जता दिया।

वो क्या समझेगा ‘ज़ोया’ तेरी ग़ज़ल, शायरी को,
कागज़ पर उतरे जज़्बात को अल्फ़ाज़ बता दिया।

© Jalpa lalani (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Note: इसकी कॉपी करना मना है।

शुक्रिया।

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ईद-ए-मिलाद-उन-नबी

ख़ुदा की बंदगी करके पाले नूर-ए-इबादत
शब-ओ-सहर कर तू सलीक़े से तिलावत
सजदा करके बदल लें अपनी किस्मत बंदे
आख़िरत में साथ देती इबादत की ताक़त।

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुबारक।🌙🌠

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

शुक्रिया

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दशहरा विशेष दोहे

सादर नमन पाठकों।🙏
आज दशहरा के पावन पर्व पर प्रस्तुत है मेरे द्वारा रचित दोहे।
आप सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

इह बसत हैं सब रावण, ना खोजो इह राम।
पाप करत निस बित जाए, प्रात भजत प्रभु नाम।।

अंतर्मन बैठा रावण, दुष्ट का करो नाश।
हिय में नम्रता जो धरे, राम करत उहाँ वास।।

कोप, लोभ, दंभ, आलस, त्यजो सब यह काम।
रखो मुक्ति की आस, नित भजो राम नाम।।

पाप का सुख मिलत क्षणिक, अंत में खाए मात।
अघ-अनघ के युद्ध में, पुण्य विजय हो जात।।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

धन्यवाद।

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पल-पल

कलयुग के इस संसार में पल-पल इंसान रूप बदलते हैं

समंदर रूपी जीवन में पल-पल हालात रुख़ बदलते हैं

स्वार्थ के बने आशियाने में पल-पल बदलते रिश्ते हैं

हीरे भी तभी चमकते हैं जब बार-बार उसे घिसते हैं

आधुनिकता के बाजार में पल-पल ख़रीददार बदलते हैं

कहानी में भी तभी मोड़ आता है जब किरदार बदलते हैं

वक़्त कहाँ रुकता है पल-पल करके साल भी बदलते हैं

ठहरा कौन है यहाँ चलने वाले हर चाल भी बदलते हैं

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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भारत के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि

Image credit: Google

क्या श्रद्धांजलि दूँ उनको क्या लिखूं उनके बारे में

ख़ुद दो हाथ से लिखते थे क्या मैं लिखूं उनके बारे में

सत्य, अहिंसा, प्रेम, धर्म, जैसे लगाते थे नारे

जिसके आगे तोप, बारूद, और गोरे भी हारे

बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो

सीख सीखाते बापू के तीन बंदर

आज अन्याय देखकर अँधे बन बैठे हैं सब लोग

मदद के लिए पुकारती आवाज़ को अनसुना करते हैं लोग

बात बात पर अशिष्ट भाषा का प्रयोग करते हैं लोग

क्या यही सीख ली इन बंदर से?

पूरा जीवन बिता दिया हमें आज़ाद करने में

आज वही आज़ादी का फ़ायदा उठा रहे हैं लोग

मिटाया उन्होंने ऊँच-नीच के भेदभाव को

बढ़ाया हमने ग़रीब-तवंगर के भेदभाव को

स्वदेशी उत्पादन को अपनाया ख़ुद चरखा चलाकर

भारतीय उद्योग को क्या उपहार देंगे हम विदेशी अपनाकर!

साफ रखें सब घर, गली, आँगन, उद्यान

सच में यही है स्वच्छ भारत अभियान

नहीं हराया जाता है किसी को हिंसा से

जीता जा सकता है किसी को अहिंसा से

आज़ादी के लिए कई बार गए है जेल किया है आमरण अनसन

आज एक दिन के व्रत पे भी नहीं कर पा रहे हैं अनसन!

तो आओ अपनाएं गांधी के विचारों को आज

शायद यही दी जाए उनको श्रद्धांजलि आज।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया

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दीदार-ए-हसरत

दीदार-ए-हसरत  में नज़रें जमाए  बैठे है

निगाह-ए-जमाल की तलब लगाए बैठे है

ख़ार  चुभ  न जाए कहीं  पाक  कदमों में

कि राह  में दफ़्तर-ए-गुल  बिछाए बैठे है।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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सपनों की बारात

पलकों के रथ पे सवार होकर, सपनों की बारात आ गई
सितारों की चुनरी ओढ़कर, रात दुल्हन सी सज गई

चाँदनी से सजा आसमाँ का मंडप, हवा बजाये शहनाई
बाराती बन बादल झूम रहे, खुशियों की बौछार है छाई

आफ़ताब से सेहरा हटाकर, उम्मीद की किरण है आई
सुबह का हुआ स्वागत, रात की हो गई फिर बिदाई।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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यादों के उजाले

शाम ढले तेरी यादों के उजाले में चली जाती हूँ अक्सर,
शब-ए-हिज़्र में फ़लक के चाँद में तुम्हें पाती हूँ मयस्सर।

शाम-ए-ग़म में बढ़ जाता है इस क़दर तन्हाई का तिमिर,
धुएँ से उभरती तस्वीर तेरी, प्रीत का दिया करती हूँ मुनव्वर।

माज़ी में तेरे साथ बिताए खूबसूरत लम्हात हमें याद आते हैं,
ख़्यालों में आगोश में आकर, तेरी खुश्बू साँसों में लेती हूँ भर।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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एक ख़त उनके नाम

दिल के कागज़ पे एक ख़त उनके नाम लिख रही हूँ
बेशक़ बग़ैर पते का है वो मुक़ाम, जहाँ भेज रही हूँ

मन में उठते हर सवाल का उससे जवाब मांग रही हूँ
धोखे से मिले ज़ख्मों का, उससे मरहम मंगा रही हूँ

न समझे लफ़्ज़ों की बोली, सिर्फ एहसास जता रही हूँ
सारे रिश्ते नाते तोड़ के उससे गहरा रिश्ता बना रही हूँ

पहुँच जाए ख़त दर-ए-मक़सूद पे, यही राह देख रही हूँ
समा जाऊँ नूर-ए-खुदा में, ख़ुद को काबिल बना रही हूँ।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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जज़्बात की ग़ज़ल

मेरे दिल में दफ़न जज़्बात कभी उभर जाते हैं,

ये कागज़ कलम वो एहसास बयाँ कर जाते हैं।

मन के भंडार में छुपे ख़यालात,भावों में पिरोकर,

अनकहे अल्फ़ाज़ को कागज़ पर उतार जाते हैं।

रच  जाती है  पूरी किताब दास्ताँ-ए-ज़िंदगी की,

कि जज़्बात की ग़ज़ल से हर सफ़ा भर जाते हैं।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

शुक्रिया।

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बड़ों का साया

तपती धूप में है घने दरख़्त सा बड़ों का साया
ग़म के अँधेरे में हैं ख़ुशियों सा जगमगता दिया

सफ़र-ए-ज़ीस्त में हरदम उसे साथ खड़े हैं पाया
ख़्वाहिश हुई मुकम्मल दुआ में जब हाथ उठाया

सिरातल मुस्तक़ीम का रास्ता उसने है दिखाया
ख़ुशनसीब हैं वो जिसके सर पर है बड़ों की छाया।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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Watch “#shayri #poem सजा-ए-इश्क़ में ऐसा ज़ख्म खाया मैंने Poem by Jalpa Kalani ‘Zoya’ / POETRY STAGE” on YouTube

Hello, friends

Mujhe aap sab ki madad ki aavshyakta hain. YouTube me jaakar mere is video me likes aur comments karen. Aur jitna ho sake mere video ko share karen.

Thank you in advance.😊🙏

© Jalpa lalani ‘Zoya’

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किताब-ए-ज़ीस्त

किताब-ए-ज़ीस्त के असरार खुल रहे हैं,
हर पन्ने पर कहानी के किरदार बदल रहे हैं।

खुशी की स्याही से लिखी हैं कुछ इबारत,
तो कोई कागज़ गम-ए-हयात से जल रहे हैं।

पीले ज़र्द पन्ने की कोने में पड़ी हैं सिसकती,
राज़ बेपर्दा होते ही हर इक सफ़ा मसल रहे हैं।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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भाई की कलाई

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प्रेम रूपी राखी जुड़ी जज़्बात के नाजुक धागे से
रेशमी रिश्ते की राखी गुँथी है रक्षा के वचन से
स्नेह के बंधन में बांधी गई एक अटूट विश्वास से
खट्टी मीठी नोकझोंक से बनी सुनहरे प्यारे रंगों से

बड़े इंतज़ार के बाद घर खुशियां लेके बहन आई
कुमकुम, चावल, राखी, मिठाई से थाली सजाई
सूनी थी जो,आज चाँद सी चमके भाई की कलाई
हरख भाई का दिखे, बहन कुमकुम तिलक लगाई

प्यारी बहना को आज भाई ने दिया अनमोल उपहार
दुनिया में सबसे अनोखा है भाई-बहन का प्यार
माँ जैसे करती दुलार, बेटी के बिना अधूरा परिवार
जग के सारे पर्व में सबसे न्यारा है राखी का त्यौहार।

🌸आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ🌸

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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ईद मुबारक

Image Source: Internet

ईद के मुक्कदस मौके पर, आज तो आकर मिल जाओ
है दरमियाँ गिले-शिकवे, आज गले लगाकर भूल जाओ
क़ुबूल करके यह रिश्ता, ख़ुदा ने प्यार से इसे है नवाज़ा
रिश्ते में है गलतफहमी की दरार, आज इसे सिल जाओ।

आप सभी को ईद मुबारक🌙🌠

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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Motivational quotes

Jealousy doesn’t burn a human being but it burns a human soul.

★★★★★★★★★★★★★★★

Your courage brings you out of your dark days.

★★★★★★★★★★★★★★★

I admire the courage of those who come out of every storm of life despite physical defect.

★★★★★★★★★★★★★★★

Being romantic is not just a physical love, but it is about caring and making your partner happy.

★★★★★★★★★★★★★★★

The aroma of books still reminds me of my childhood.

© Jalpa lalani ‘Zoya’

Thanks for reading!

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कोरोना

इक और आविष्कार किया खाने के शौकीन चीन ने
सीमाओं से निकलकर खतरा फैलाया पूरे विश्व में

तुलसी, अदरक, गिलोय, सब अपने-अपने नुस्खे बताते है
कौनसा इलाज! पक्का नहीं पता कौनसा काम आता है

वो दिन गए सब भूल जब अभिवादन में हाथ मिलाए जाते थे
आज भारत के नमस्कार के संस्कार को पूरी दुनिया ने अपनाया है

साँस से साँस मिलाकर जीवनदान देते कभी सुना था
अब साँसों में समाकर कोरोना साँस छीन जाता है

कभी हिफाज़त-ए-हुस्न को परदा गिराया करते थे
आज रक्षा हेतु हरएक मुँह पर नक़ाब लगाएं फिरते है

गर रोकना हो विषाणु का संक्रमण होते हुए
सब मिलकर एहतियात बरतें, वरना गंभीर खतरा बन सकता है

कहाँ से पैदा हुआ यह कोरोना, या है कुदरत का कोई इशारा
जल्द ही इसका समाधान खोजें, हरकोई यही उम्मीद लिए बैठे है।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

धन्यवाद।

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My favourite colour

My favourite colour is white 

Because when I feel dark, it gives me light.

My favourite colour is blue

Because when I feel down, it reminds my value.

My favourite colour is green

Because when I feel old, it keeps me sweet sixteen.

My favourite colour is yellow

Because when I feel alone, it connects me with good fellows.

My favourite colour is pink

Because when I start to drown my mind, it becomes my brink.

My favourite colour is red

Because it keeps my worth alive, when my self love fade.

My favourite colour is black

Because when I go to my dark days, it brings me back.

You should love all the colours

Because they never let your life become colourless.

© 2020 Jalpa lalani ‘Zoya’ All rights reserved.

Thank you for reaching!

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होली है!

मुझे याद आती बचपन की वो होली

एक साथ निकलती हम बच्चों की टोली

रंग, गुलाल, पानी के गुब्बारे, और पिचकारी

कर लेते थे अगले दिन सब मिलके तैयारी

रंग-बेरंगी कपड़े हो जाते

जैसे इन्द्रधनुष उतर आया धरती पे

रंग जाते थे संग में सब के बाल

ज़ोरो ज़ोरो से रगड़ के लगाते गुलाल

बाहर निकलते ही सब को डराते

किसीके घर के दरवाज़े भी रंग आते

सामने देखते बड़े लड़को की गैंग

सब को चिड़ाते वो सब पी के भांग

वो सब के साथ मिलके गाते गाने

वो चिल्लाते जाते… होली है…!

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

धन्यवाद।

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क्यों?

सहनशीलता पत्नी की ऐसी सीता सी तू
फ़िर दहेज की लालच में तुझे दुत्कारते हैं क्यों?

त्याग प्रेयसी का ऐसी राधा सी तू
फ़िर अपमानित की जाती है हर जगह क्यों?

सुंदरता स्त्री की ऐसी अहल्या सी तू
फ़िर एसिड से तेरी सुंदरता को नष्ट करते हैं क्यों?

पावनता पौधे की ऐसी तुलसी सी तू
फ़िर भ्रूण में तेरी हत्या की जाती हैं क्यों?

कोमलता फूल की ऐसी गुलाब सी तू
फ़िर जिंदा तुझे जलाया जाता हैं क्यों?

पवित्रता नदी की ऐसी गंगा सी तू
फ़िर तेरे चरित्र पर लांछन लगाया जाता हैं क्यों?

रस भक्ति का ऐसी मीरा सी तू
फ़िर लड़ती जब न्याय को तो आवाज़ दबाई जाती हैं क्यों?

पतिव्रता अर्धांगिनी की ऐसी उर्मिला सी तू
फ़िर आज भी सुरक्षित नहीं है नारी, आप ही बताए क्यों?

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Note: यह रचना प्रकाशित हो चुकी है और कॉपीराइट के अंतर्गत आती है।

धन्यवाद।

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कल हो न हो

आज बरसों बाद फ़िर से वो दिन आया था, 

मेरी दोस्त ने मिलने का आयोजन बनाया था। 

खो गये थे वक़्त के भवँर में दोनों, 

जब मिले भाव-विभोर बन गए दोनों। 

ये एक दिन सिर्फ़ हमारी दोस्ती के नाम, 

पूरे करने है वो सारे अधूरे अरमान। 

फ़िर क्या पता कल हो न हो….. 

आहना के साथ शुरू हुआ सुन्दर दिन हमारा, 

अभी तो साथ बिताना है दिन सारा। 

अभी भी था उसमें वहीं बचपना, 

ज़िद थी उसकी मेरे हाथ का खाना। 

अब जल्दी तैयार हो बाज़ार भी है जाना, 

उसका हमेशा से था हर बात में देरी करना। 

ये लेना है, वो लेना है करते करते पूरा बाज़ार घूम लिया, 

फ़िर भी मैं खुश थी ना जाने फ़िर कब मिले ये खुशफहमिया। 

फ़िर क्या पता कल हो न हो….. 

अब कितनी करनी है ख़रीदारी मुझे भूख लगी है भारी, 

क्या पता था एक दिन यही बातें, यादें बनेगी सुनहरी। 

अभी तो कितने ईरादे है, है कितनी ख्वाहिशें, 

आज पूरी करनी है मेरी दोस्त की हर फ़रमाइशें। 

पहली बार सिनेमा देखने गये साथ, 

इतने सालों बाद आज पूरी हुई हसरत। 

फ़िर क्या पता कल हो ना हो….. 

वो साम भी कितनी हसीन थी 

दोस्त के साथ समुद्र की लहरे थी

फ़िर से बच्चे बन गये थे फ़िर से रेत में घर बनाये थे 

फ़िर से कागज़ की कश्ती बहाई थी। 

उफ्फ़! ये रात को भी इतनी जल्दि आना था, 

दोनों को अपने अपने घर वापस भी तो जाना था। 

नहीं भूल पाएंगे वो पल, वो एक दिन को, 

साथ ख़ूब हँसे दोनों, भेट कर रो भी लिए दोनों। 

फ़िर क्या पता कल हो न हो….. 

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Note: यह रचना प्रकाशित हो चुकी है और कॉपीराइट के अंतर्गत आती है।

शुक्रिया।

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चाँद बेवफ़ा नही होता

किसी ने कहा था मुझे तुम हो चाँद सा नूर 

तुम्हारी खूबसूरती से मचल जाता है दिल मेरा 

जैसे चाँद की रोशनी दूर करती है अंधेरा 

शायद वह मोह था रूप का तभी चले गए दूर। 

अब वही चाँद से किया करते है हम गुफ़्तगू 

पूछते है उससे कई सवाल 

मैं भी तो काला हूँ, मुझे रोशनी देता है रवि 

यह कहकर समझाता है मुझे चाँद। 

तू मत हो हताश तेरे हुश्न पर 

कोई नहीं समझ पायेगा तेरा दिल 

तू कर गुमान अपने दिल की सुंदरता पर 

जब भी हो मन तेरा उदास तू मुझसे आके मिल। 

मेरी भी पूरी नही होती आशा 

कभी मैं भी आसमान में नही होता 

कभी आता हूँ पूरा तो कभी आधा

चाँद की यही बातो से हो गई मैं फ़िदा। 

सह लिया सब से हमने धोखा 

आज करते हैं हम इक़रार 

अब कर लिया है चाँद से हमने प्यार 

क्योंकि चाँद बेवफ़ा नही होता। 

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Note: यह रचना प्रकाशित हो चुकी है और कॉपीराइट के अंतर्गत आती है।

शुक्रिया।

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ख़ुद से प्यार

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ…

बड़ी मुश्किलों के बाद

अपने आपसे यह इज़हार करती हूँ

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ। 

ज़िंदगी ने दिए हैं ज़ख़्म  कई 

तभी अपने आपसे प्यार करती हूँ  

छोड़ दिया हैं तन्हा सभी ने 

अब तन्हाईयो में ख़ुद से बात करती हूँ…

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ।

ख़ुदग़र्ज़ लगूँगी मैं आपको 

पर ख़ुदग़र्ज़ ना कहना मुझे 

बड़ी मुश्किलों के बाद…

हिम्मत जुटाई है मैंने,

यूँ तो आसान होगा 

किसी और से इज़हार करना 

कभी अपने दिल से 

ख़ुद इज़हार करके तो देख 

कितना प्यार आता है ख़ुद पे 

ज़रा एक बार करके तो देख 

यही तन्हाईयो में ख़ुद से बार बार कहती हूँ,

आईने में देखकर ख़ुद से मुलाकात करती हूँ…

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ।

यूँ तो कई से प्यार करके देखा है मैंने 

पर प्यार न मिलने का ग़म हर बार सहा है मैंने 

तो क्यूँ ना अपने आपसे प्यार किया जाए? 

चलो एकबार यह भी करके देख लिया जाए 

ख़ुद से यही ज़िक्र बार बार करती हूँ…

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ।

यूँ तो रोते हुए को देखकर 

आँसू आए हैं मेरी आँखों में 

हर रोते हुए को हसाया हैं मैंने 

नवाज़ा है खुदा ने मुझे इस इनायत से 

कहा है मूझसे, सभी को प्यार बाँटते हुए 

कभी अपने आपसे भी प्यार कर ले,

ख़ुदा की यहीं रहमत को 

सजदे के साथ इक़रार करती हूँ… 

हाँ! मैं ख़ुद से प्यार करती हूँ।

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Note: यह रचना पब्लिश हो चुकी है। यह रचना कॉपीराइट के अंतर्गत है।

शुक्रिया।