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मुश्किल हो सकता है

बेशक अकेले चलना मुश्किल हो सकता है
लेकिन इस भीड़ में साथ चलने वाला है कौन?

बेशक सच बोलना मुश्किल हो सकता है
लेकिन झूठ बोलने से आगे निकल पाया है कौन?

बेशक दुःख में हंसना मुश्किल हो सकता है
लेकिन खुशी में खुलकर हँसने वाला है कौन?

बेशक दुश्मन से लड़ना मुश्किल हो सकता है
लेकिन लड़ाई में साथ देने वाला दोस्त है कौन?

बेशक किसी को खोना मुश्किल हो सकता है
लेकिन साथ होने के बावजूद यहाँ साथ है कौन?

बेशक सपने को साकार करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन बिना सपनों के यहाँ सोता है कौन?

बेशक किसी को माफ करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन बदला लेके यहाँ जीत पाया है कौन?

बेशक मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है
लेकिन यहाँ आसानी से महान बन पाया है कौन?

बेशक जीवन की पहेली हल करना मुश्किल हो सकता है
लेकिन अंत से पहले इस पहेली को हल कर पाया है कौन?

© Jalpa lalani ‘Zoya’ (स्वरचित)

सर्वाधिकार सुरक्षित

धन्यवाद।

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पल-पल

कलयुग के इस संसार में पल-पल इंसान रूप बदलते हैं

समंदर रूपी जीवन में पल-पल हालात रुख़ बदलते हैं

स्वार्थ के बने आशियाने में पल-पल बदलते रिश्ते हैं

हीरे भी तभी चमकते हैं जब बार-बार उसे घिसते हैं

आधुनिकता के बाजार में पल-पल ख़रीददार बदलते हैं

कहानी में भी तभी मोड़ आता है जब किरदार बदलते हैं

वक़्त कहाँ रुकता है पल-पल करके साल भी बदलते हैं

ठहरा कौन है यहाँ चलने वाले हर चाल भी बदलते हैं

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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गुरु

अज्ञान का अंधकार मिटाकर, ज्ञान का दीपक जलाता है
उँच-नीच ना देखकर, वो अपना फ़र्ज़ बखूबी निभाता है

सत्य, अनुशासन का पाठ पढ़ाकर, हर बुराई मिटाता है
हर सवाल का जवाब देकर, सारी उलझन सुलझाता है

भटके हुए को राह दिखाकर, वह मार्गदर्शक बन जाता है
स्वयं में आत्मविश्वास जगाकर,लक्ष्य की मंजिल दिखाता है

पाप एवं लालच त्याग कर, धार्मिक संस्कार सिखाता है
गुमनामी से बाहर लाकर, एक नई पहचान दिलाता है

अज्ञानता के भंवर से निकाल कर, नैया पार लगाता है
संचित ज्ञान का धन देकर, सबका जीवन संवारता है

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान सफल हो जाता है
शिष्य बुलंदियों को छूकर, गुरु चरणों में शीश झुकाता है।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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ईद मुबारक

Image Source: Internet

ईद के मुक्कदस मौके पर, आज तो आकर मिल जाओ
है दरमियाँ गिले-शिकवे, आज गले लगाकर भूल जाओ
क़ुबूल करके यह रिश्ता, ख़ुदा ने प्यार से इसे है नवाज़ा
रिश्ते में है गलतफहमी की दरार, आज इसे सिल जाओ।

आप सभी को ईद मुबारक🌙🌠

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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कोशिश की जाए

कुछ ना करने से बेहतर है थोड़ी सी कोशिश की जाए
धर्म निभाते तंगदस्त को थोड़ी सी बख़्शिश दी जाए

ज़्यादा पाने की चाह में जो पास है उसे ना खो देना
आँख बंद करके सही ख़ुद से कुछ ख़्वाहिश की जाए

थोड़ी ज़्यादा मशक्कत करने से मुक़ाम ज़रूर पायेगा
नई शुरुआत से पहले बड़ो की दुआ, आशीष ली जाए।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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आगाज़-ए-शायरी(शेर-ओ-शायरी)

यकीन है खुदा पर तभी इम्तिहान ले रहा है मेरा

दर्द दे कर रुलाता है, फ़िर हँसाता भी है

बार बार गिराता है, फ़िर उठाता भी है

मैं भी देखती हूँ कि दर्द जीतता है या यकीन मेरा।

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लोग हमे पागल समझते है, हमारी हँसी को देखकर

अब उन्हें क्या पता इस हँसी के पीछे रखते है कितने दर्द छिपाकर।

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जिन आँखों में गहरा झील बसता था

जिंदगी ने है इतना रुलाया

सूख गया है ग़म-ए-समंदर

अब तो अश्क़ भी नहीं गिरता।

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उसने कहा दवाई ले लो ताकि दिल का दर्द कम हो

अब उन्हें कैसे कहे कि दिल के हक़ीम ही तुम हो।

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शेरो-शायरी लिखना हमें कहा आता है

ये तो दिल के एहसास है जो उभर आते है।

© Jalpa lalani ‘Zoya’

शुक्रिया।

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Motivational quotes

Jealousy doesn’t burn a human being but it burns a human soul.

★★★★★★★★★★★★★★★

Your courage brings you out of your dark days.

★★★★★★★★★★★★★★★

I admire the courage of those who come out of every storm of life despite physical defect.

★★★★★★★★★★★★★★★

Being romantic is not just a physical love, but it is about caring and making your partner happy.

★★★★★★★★★★★★★★★

The aroma of books still reminds me of my childhood.

© Jalpa lalani ‘Zoya’

Thanks for reading!

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क्यों जा रहे हो?

ज़िंदगी की जंग से हार कर यूँ मुँह मोड़कर तुम क्यों जा रहे हो?
अँधेरे में जाकर अपने ही अक्स को ख़ुद से क्यों छुपा रहे हो?

दुनिया की भीड़ से दूर सारे बंधन तोड़कर अकेले कहाँ जा रहे हो?
ख़ुद की आँखे बंद करके अपने आपसे ही क्यों नज़रें चुरा रहे हो?

तन्हाई छोड़ इस जहाँ की महफ़िल में तुम अपनी पहचान बनाओ
अँधेरे रास्ते की वीरानगी में उम्मीद की लौ से तुम रोशनी जलाओ

आँखों में है जो अधूरे ख़्वाब मुकम्मल करके उसे हकीकत बनालो
अपनो के साथ मिलकर बेरंग ज़िंदगी में खुशियों के रंग तुम भरलो।

~Jalpa ‘Zoya’