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कतल इश्क़ का

1222  1222  122
कि दर्द-ए-दिल ये दिलबर ने दिया है,
कतल ये इश्क़ का उसने किया है।

मुहब्बत में सनम ने करके धोखा,
बदल ज़ालिम ने ख़ुद को ही लिया है।

जो मेरी रूह पर खंजर चला तो,
वो हर अश्क़-ए-लहू मैंने पिया है।

मेरी हर साँस में है साँसें उसकी,
न इक लम्हा भी उसके बिन जिया है।

नहीं मांगा था हमने तो कभी भी, 
ये ग़म का तोहफ़ा फ़िर क्यों दिया है!

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’

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मैं लब हूँ वो अल्फ़ाज़ है

2212  2212


मैं लब हूँ वो अल्फ़ाज़ है,
मैं नज़्म, वो जज़्बात है।

दिल की ज़मीं सूखी मेरी,
वो अब्र, वो बरसात है।

हर वक़्त, हर पल पास है,
वो दिन, वो मेरी रात है।

फ़िक्र-ए-सुख़न में मेरी वो,
तहरीर का एहसास है।

क़ुरआन का वो हर सफ़ा,
वो सूरा वो आयात है।

वो ज़ीस्त-ए-ज़ोया की हर,
खुशियों की वो सौग़ात है।

Copyright © 2021 Jalpa lalani ‘Zoya’ (सर्वाधिकार सुरक्षित)

शुक्रिया😊