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सोचा न था

2212   2212   2212   2212 बह्र में ग़ज़ल तेरी जुदाई में जी पाएंगे कभी सोचा न था,वो था फ़रेब-ए-इश्क़ तेरा, वो भी तो सच्चा न था। एतबार के धागे से बंधा राब्ता था अपना जो,यूँ टूटा इतना भी हमारा रिश्ता ये कच्चा न था। ख़्वाहिश थी तुझको इक दफ़ा देखूँ पलटकर भी मगर,मुझको […]

तुम हो

दोस्तों बह्र में मेरी पहली ग़ज़ल पेश-ए-ख़िदमत है। बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन 1222 1222 1222 मिरी हर बात में, हर लफ़्ज़ में तुम हो,जुदा ना मुझसे, मेरे अक्स में तुम हो। तिरी ख़ुश्बू से मेरी, साँसें है चलती,मिरे दिल तक हैं जो,हर नब्ज़ में तुम हो। तू ही रब, तू दुआ भी […]